7. स्वयं सहायता समूह के नेता या प्रतिनिधि कौन होंगे एवं उनके चुनाव की प्रक्रिया एवं जिम्मेवारी क्या होगी?
| 7. प्रतिनिधि कौन होंगे एवं उनके चुनाव की प्रक्रिया एवं जिम्मेवारी क्या होगी? |
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प्रक्रिया एवं जिम्मेवारी :- एक समूह अथवा संगठन प्रभावी तब ही होता है जब उसको सशक्त एवं सक्षम नेतृत्व मिलता है। समूह को ऐसे नेतृत्व की तलाश करनी चाहिए जो चर्चा सत्र में मार्गदर्शक और संप्रेषक (बाहरी जानकारी को समूह में बताना) की भूमिका अदा कर सके तथा आपसी विवादों का सामूहिक रूप से शांतिपूर्वक निपटारा करवा सके। प्रायः देखा गया है कि नेतृत्व ऐसी महिलाओं या लोगों के हाथ में चला जाता है जिनकी पहचान पहले से होती है, वे मुखर होते हैं और उनके पास जानकारी होती है। इन बातों को ध्यान में रखते हुए समूह को अपने प्रतिनिधि के रूप में ऐसे व्यक्ति को प्राथमिकता देनी चाहिए जो समूह का अच्छा प्रतिनिधि बनने में सक्षम हो एवं सबको साथ लेकर चलने वाला हो। किसी स्वयं सहायता समूह के प्रभावी प्रबंधन हेतु तीन प्रतिनिधियों की आवश्यकता होती है जो कि समूह को मेतृत्व देने की भूमिका भी अदा करते है ।
समूह के यह प्रतिनिधि अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं अतः इन पदों पर ऐसे प्रतिनिधियों की नियुक्ति की जानी चाहिये जो कि समूह को दिशा दे सके एवं समूह के सही सदस्यों का प्रतिनिधित्व करते हों । समूह के प्रतिनिधियों का चुनाव एक मत से किया जाना उपयोगी होता है। इनके अलावा समूह लेखा सहायक की भी नियुक्ति कर सकता है। समूह के नेता की भूमिका सबको साथ लेकर चलने और समूह को सरका बनाने की होती है। इन प्रतिनिधियों के कार्य एवं जिम्मेदारी निम्नानुसार हैं, यदि किसी समूह को इसके अतिरिक्त जवाबदारी अपने प्रतिनिधियों को देनी है तो वह समूह में चर्चा कर तय कर सकता है।
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